Rashmi Mamgain


तोड़कर सब रस्मों की ज़ंजीर को 


तोड़कर सब रस्मों की ज़ंजीर को 

आज़माये चल ज़रा तक़दीर को।
सौंप दूँ जज़्बात दिल के मैं जिसे,
ढूंढता रहता हूँ दिल की हीर को।
तू अगर क़िस्मत में मेरी जो नहीं
दिल में रक्खूंगा तेरी तस्वीर को।
जग की सारी पोथियां पढ़ लो मगर
कौन पढ़ पाया नयन के नीर को।
"रश्मि" सारा ही जहाँ उसका हुआ
जीत ले जो दिल की इस जागीर को।

🌹रश्मि ममगाईं 🌹