Rashmi Mamgain
कैसे कहे कि तुम बिन कैसे हैं दिन गुज़ारे
कैसे कहे कि तुम बिन कैसे हैं दिन गुज़ारे
दिन रैन काटते हैं बस याद के सहारे।
कैसे बचेगा अब दिल कैसे बचेंगे अब हम
करते ग़ज़ब हैं जानम ये आपके इशारे।
घुटनों पे बैठ कर के बोले वो मुझसे इक दिन
क़दमों पे लाके रख दूँ ये चाँद ये सितारे।
ये सादगी तुम्हारी भाने लगी है मुझको
बस एक ही नज़र में हम तो हुए तुम्हारे।
सागर से मिलने पहुंची अल्हड़ नदी जो आकर
सागर नदी से बोला सँग ज़िन्दगी गुज़ारे।
अब जानने लगी हूँ हर बात उसके दिल की
वो जीत कर भी मुझसे क्यूँ बार बार हारे।
रखना सँभाल रशमी रिश्ते हैं क़ीमती सब
हैं फीके इसके आगे दौलत के हर नज़ारे।
रश्मि ममगाईं 
दिन रैन काटते हैं बस याद के सहारे।
कैसे बचेगा अब दिल कैसे बचेंगे अब हम
करते ग़ज़ब हैं जानम ये आपके इशारे।
घुटनों पे बैठ कर के बोले वो मुझसे इक दिन
क़दमों पे लाके रख दूँ ये चाँद ये सितारे।
ये सादगी तुम्हारी भाने लगी है मुझको
बस एक ही नज़र में हम तो हुए तुम्हारे।
सागर से मिलने पहुंची अल्हड़ नदी जो आकर
सागर नदी से बोला सँग ज़िन्दगी गुज़ारे।
अब जानने लगी हूँ हर बात उसके दिल की
वो जीत कर भी मुझसे क्यूँ बार बार हारे।
रखना सँभाल रशमी रिश्ते हैं क़ीमती सब
हैं फीके इसके आगे दौलत के हर नज़ारे।
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