Rashmi Mamgain
शोख़ नज़रों का इशारा देखना
शोख़ नज़रों का इशारा देखना
हो गया है दिल दीवाना देखना
रूठना भी है ग़ज़ब तेरा सनम,
दूर जाना पास आना देखना।
रोज़ नींदों से जगाता है मुझे
चश्म-ए-तर वो तुम्हारा देखना।
इम्तिहाँ ये ज़िन्दगी के भी अजब
पाके खोना खो के पाना देखना।
रश्मि उसका ख़त मिला बेबस हुई
भूल बैठी हँसना रोना देखना।
रश्मि ममगाईं
शोख़ नज़रों का इशारा देखना
हो गया है दिल दीवाना देखना
रूठना भी है ग़ज़ब तेरा सनम,
दूर जाना पास आना देखना।
रोज़ नींदों से जगाता है मुझे
चश्म-ए-तर वो तुम्हारा देखना।
इम्तिहाँ ये ज़िन्दगी के भी अजब
पाके खोना खो के पाना देखना।
रश्मि उसका ख़त मिला बेबस हुई
भूल बैठी हँसना रोना देखना।
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