Rashmi Mamgain
दो साल पहले लिखी एक छंद मुक्त रचना
अजब तेरी दुनिया है दुनिया बनाने वाले
अजब तेरी दुनिया है दुनिया बनाने वाले
घर बड़े हैं पर दिलों पर है ताले।
सराय सरीखी है, दो दिन ठहरना मुसाफिर सभी है बस जीना और मरना
खोज रही हूँ अब पता तेरे घर का
न जाने कब हो दर्शन तेरे दर का।
तेरी दुनिया ने हमको है बहुत भरमाया
न जान पाए कौन है अपना कौन पराया।
भवसागर पार करा दो खिवैया
माझीं पार लगा दो मेरी नैया।
जेबें हैं खाली मैं क्या मोल दूँगी
हृदय में बसे हो, ह्रदय खोल दूँगी।
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