वफ़ा दो सज़ा दो या चाहे जफ़ा दो
वफ़ा दो सज़ा दो या चाहे जफ़ा दो
मेरी इस मुहब्बत का कुछ तो सिला दो।
तुम्हारी निगाहों का हम पर असर है
इन्हीं शोख़ नज़रों का थोड़ा नशा दो।
ग़ज़ब तिश्नगी है सनम प्यार में अब
न यूँ दरमियां तुम कोई फ़ासला दो।
न छूटे ये बंधन भी जन्मों जनम तक
ये जन्मों का वादा मुझे हमनवा दो।
न रूठो यूँ हमसे कि मर जाएंगे हम
मेरी जाने जाना ज़रा मुस्कुरा दो।
मुहब्बत किसी की न रुठे कभी भी
यही प्रार्थना हो यही अब दुआ दो।
मुहब्बत की ग़ज़लें मुहब्बत की नज़्में
चलो "रश्मि" दुनिया को अब तुम सुना दो।
वफ़ा दो सज़ा दो या चाहे जफ़ा दो
मेरी इस मुहब्बत का कुछ तो सिला दो।
तुम्हारी निगाहों का हम पर असर है
इन्हीं शोख़ नज़रों का थोड़ा नशा दो।
ग़ज़ब तिश्नगी है सनम प्यार में अब
न यूँ दरमियां तुम कोई फ़ासला दो।
न छूटे ये बंधन भी जन्मों जनम तक
ये जन्मों का वादा मुझे हमनवा दो।
न रूठो यूँ हमसे कि मर जाएंगे हम
मेरी जाने जाना ज़रा मुस्कुरा दो।
मुहब्बत किसी की न रुठे कभी भी
यही प्रार्थना हो यही अब दुआ दो।
मुहब्बत की ग़ज़लें मुहब्बत की नज़्में
चलो "रश्मि" दुनिया को अब तुम सुना दो।
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