बेवज़ह ही वो मुस्कुराते हैं
बेवज़ह ही वो मुस्कुराते हैं
अश्क़ आँखों के यूँ छिपाते हैं
बेख़बर हम नहीं है दुनिया से
मौन रहकर के बस निभाते हैं।
तोलते हैं वज़न वो रिश्तों का,
कैसे रिश्ते हैं कैसे नाते हैं।
वक़्त की भी नहीं क़दर उनको
किस क़दर वो हमें सताते हैं।
ये मुहब्बत ये प्यार ये कसमे
रश्मि कहने की सिर्फ़ बातें हैं
बेख़बर हम नहीं है दुनिया से
मौन रहकर के बस निभाते हैं।
तोलते हैं वज़न वो रिश्तों का,
कैसे रिश्ते हैं कैसे नाते हैं।
वक़्त की भी नहीं क़दर उनको
किस क़दर वो हमें सताते हैं।
ये मुहब्बत ये प्यार ये कसमे
रश्मि कहने की सिर्फ़ बातें हैं
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