याद आया वो तुम्हारा देखना ...poetess Rashmi Mamgain

 

याद आया वो तुम्हारा देखना

याद आया वो तुम्हारा देखना
मुझको वो होके दिवाना देखना।
दूर जाना जब पड़ा तुमको सनम,
मुड़ के तब मुझको दुबारा देखना।
सबकी क़िस्मत में लिखा होता कहाँ,
ख़ुद का ही इक आशियाना देखना।
बूढ़े माँ बाबा की जब सेवा करो,
रहमतों का तब ख़ज़ाना देखना।
अब कहाँ होता है इस संसार में
पर्व पर मिलना मिलाना देखना।
रूठ जाते हैं कभी जब तुमसे हम,
प्यार से ज़ुल्फ़ें हटाना देखना।
"रश्मि" तेरे गीत ग़ज़लों को कभी,
याद रक्खेगा ज़माना देखना।

🌹रश्मि ममगाईं🌹

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