कुर्सियां वो पा गये हैं ......poetess Rashmi Mamgain

 


Rashmi Mamgain

कुर्सियां वो पा गये हैं

कुर्सियां वो पा गये हैं
असलियत दिखला गये हैं।
मुफ़्त का फिर फैंक दाना,
जनता को भरमा गये हैं।
भूख से बेबस थे मुफ़लिस
इसलिए ललचा गये हैं।
धर्म की दीवार लेकर,
बेवजह टकरा गये हैं।
रश्मि किसको दोष दे अब,
क्या ज़माने आ गए हैं।

🌹रश्मि ममगाईं🌹

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