Rashmi Mamgain
कुर्सियां वो पा गये हैं
कुर्सियां वो पा गये हैं
असलियत दिखला गये हैं।
मुफ़्त का फिर फैंक दाना,
जनता को भरमा गये हैं।
धर्म की दीवार लेकर,
बेवजह टकरा गये हैं।
रश्मि किसको दोष दे अब,
क्या ज़माने आ गए हैं।
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