Rashmi Mamgain
रूठ कर हमसे किधर जाएंगे,
रश्मि ममगाईं 
रूठ कर हमसे किधर जाएंगे,
आके पहलू में ठहर जाएंगे।
लब जो छू लें तो निखर जाएंगे,
फूल बनकर के बिखर जाएंगे।
इंतहा हो गई है आ जाओ
तुम न आये जो तो मर जाएंगे।
बेसबब अब ये मुहोब्बत होगी
इश्क़ की हद से गुज़र जाएंगे।
बेवफ़ा हम भी नहीं तुम भी नहीं
फिर वज़ह क्या के जो डर जाएंगे।
रश्मि रोकेंगे मुझे क्या ग़म अब
रौशनी बन के उभर जाएंगे।
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