रूठ कर हमसे किधर जाएंगे, ...poetess Rashmi Mamgain

 


Rashmi Mamgain

रूठ कर हमसे किधर जाएंगे,

रूठ कर हमसे किधर जाएंगे,
आके पहलू में ठहर जाएंगे।
लब जो छू लें तो निखर जाएंगे,
फूल बनकर के बिखर जाएंगे।
तू जहाँ होगा उधर जाएंगे
कोई रोके भी, मगर जाएंगे।
इंतहा हो गई है आ जाओ
तुम न आये जो तो मर जाएंगे।
बेसबब अब ये मुहोब्बत होगी
इश्क़ की हद से गुज़र जाएंगे।
बेवफ़ा हम भी नहीं तुम भी नहीं
फिर वज़ह क्या के जो डर जाएंगे।
रश्मि रोकेंगे मुझे क्या ग़म अब
रौशनी बन के उभर जाएंगे।

🌹 रश्मि ममगाईं 🌹

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ