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वही होगा जो उस रब ने लिखा है
वही होगा जो उस रब ने लिखा है
यही तो ज़िन्दगी का फ़लसफ़ा है।
मुहब्बत की यही बस इक सज़ा है
कि इसमें दर्द ही बस इक दवा है।
गुलों से है मुहब्बत हमको लेकिन
कहां कांटों से भी हमको गिला है।
ज़रा खुलकर के जी लो ज़िन्दगी में
इसी में ज़िन्दगी का भी मज़ा है।
यकीं हो जिसको अपने हौसलों पर
झुकाने से कहाँ वो सर झुका है।
यही तो ज़िन्दगी का फ़लसफ़ा है।
मुहब्बत की यही बस इक सज़ा है
कि इसमें दर्द ही बस इक दवा है।
गुलों से है मुहब्बत हमको लेकिन
कहां कांटों से भी हमको गिला है।
ज़रा खुलकर के जी लो ज़िन्दगी में
इसी में ज़िन्दगी का भी मज़ा है।
यकीं हो जिसको अपने हौसलों पर
झुकाने से कहाँ वो सर झुका है।
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