तेरी इस नज़ाकत तेरी सादगी ने
तेरी इस नज़ाकत तेरी सादगी ने
मुक़म्मल है लूटा तेरी दिल कशी ने
सरेआम ख़ुद पर ही बेबस हुए हम
बहुत दिल्लगी की है दिल की लगी ने।
यकीं अब किसी पर करे कोई कैसे
छला आदमी को ही खुद आदमी ने।
छुपाये थे हमने तो जज़्बात रश्मी
बयां कर दिया आँखों की इस नमी ने।
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