ज़िन्दगी तुम बिन भला क्या दोस्तो
ज़िन्दगी तुम बिन भला क्या दोस्तो
हर घड़ी महफ़िल अगर तुम सँग रहो।
नफ़रतों को छोड़कर आगे बढ़ो
दरमियाँ हैं जो दीवारें तोड़ दो।
मंज़िलें तो हमसे रुसवा हो गई
कब तलक़ तुम साथ दोगे रास्तो।
मैल दिल के ये सभी धुल जाएंगे
दिल के दरवाजे ज़रा सा खोल दो।
है क़सम मेरी तुम्हें ऐ जाने जां
दिल में है क्या आज सब खुलकर कहो ।
"रश्मि" क्या सौदा गज़ब दिल का किया
भूल कर भी याद रक्खा आपको।
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