उनको क्या फ़िक्र भला देश में मंहगाई की।..poetess Rashmi Mamgain


उनको क्या फ़िक्र भला देश में मंहगाई की।

उनको क्या फ़िक्र भला देश में मंहगाई की।
उनको तो फ़िक्र है बस कुर्सी की ऊँचाई की।
इस ज़माने से छुपाया था जिसे बरसों से
बात तो सच है मगर बात है रुसवाई की।
है हक़ीक़त कि दिलो जान में इक वो ही है
बात ये दिल की है दिलबर की है शैदाई की।
वास्ते जिसके भुलाया है जहाँ सारा ये
है ख़बर ही नहीं उसको मेरी तन्हाई की।
बंट गए रिश्ते सभी साथ ही बंटवारे के
भाई ही लूट गया खुशियाँ सभी भाई की।

🌹रश्मि ममगाईं🌹


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