फ़िर किसी इक मोड़ पे वो जो मिलेगी एक दिन
फ़िर किसी इक मोड़ पे वो जो मिलेगी एक दिन
उस हसीं पल में मिलेगी हर ख़ुशी भी एक दिन।
रू ब रू हमसे मिलेगी ज़िन्दगी भी एक दिन
फ़िर सुबह होगी नई जब शब ढलेगी एक दिन।
इस क़दर हमसे न तुम रूठा करो देखो सनम
ये तुम्हारी दिल्लगी भी जान लेगी एक दिन।
ख़्वाब ऊँचे जो रखोगे तो मिलेंगी मंज़िलें
तब सफलताएं क़दम पर ख़ुद गिरेंगी एक दिन।
रूठ कर क़िस्मत से देखो यूँ जियेंगे कब तलक़
हों बुलंद जो होंसले क़िस्मत सजेगी एक दिन।
तुमसे नज़रें जो मिली तो ख़ुद से ही बेबस हुई
जान मेरी ले ही लेगी ये ख़ुमारी एक दिन।
है क़लम में आग तो फ़िर रश्मि तू अंगारे लिख
लिख बग़ावत और ज़ुर्रत, रौशनी भी एक दिन
उस हसीं पल में मिलेगी हर ख़ुशी भी एक दिन।
रू ब रू हमसे मिलेगी ज़िन्दगी भी एक दिन
फ़िर सुबह होगी नई जब शब ढलेगी एक दिन।
इस क़दर हमसे न तुम रूठा करो देखो सनम
ये तुम्हारी दिल्लगी भी जान लेगी एक दिन।
ख़्वाब ऊँचे जो रखोगे तो मिलेंगी मंज़िलें
तब सफलताएं क़दम पर ख़ुद गिरेंगी एक दिन।
रूठ कर क़िस्मत से देखो यूँ जियेंगे कब तलक़
हों बुलंद जो होंसले क़िस्मत सजेगी एक दिन।
तुमसे नज़रें जो मिली तो ख़ुद से ही बेबस हुई
जान मेरी ले ही लेगी ये ख़ुमारी एक दिन।
है क़लम में आग तो फ़िर रश्मि तू अंगारे लिख
लिख बग़ावत और ज़ुर्रत, रौशनी भी एक दिन

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