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कुछ तो है बात उनके चेहरे में
कुछ तो है बात उनके चेहरे में
दिल धड़कता है क्यूँ ये लम्हे में
यूँ तो झुकना नहीं है फ़ितरत पर
झुक गए हम उन्हें मनाने में।
क्या वो बातें करे उसूलों की
रोज़ बिकती है जो निवाले में।
जब परिंदे उड़ान भरते हैं
वक़्त लगता है लौट आने में।
क्या भरोसा है उन ईमानों का
बिक रहे रोज़ चंद पैसे में।
रुख़सती पे जो मेरी आये हो
देर कर दी हुज़ूर आने में।
बागबां ने बचाने को अस्मत
फूल रक्खा है क्यूँ ये पहरे में।
दिल धड़कता है क्यूँ ये लम्हे में
यूँ तो झुकना नहीं है फ़ितरत पर
झुक गए हम उन्हें मनाने में।
क्या वो बातें करे उसूलों की
रोज़ बिकती है जो निवाले में।
जब परिंदे उड़ान भरते हैं
वक़्त लगता है लौट आने में।
क्या भरोसा है उन ईमानों का
बिक रहे रोज़ चंद पैसे में।
रुख़सती पे जो मेरी आये हो
देर कर दी हुज़ूर आने में।
बागबां ने बचाने को अस्मत
फूल रक्खा है क्यूँ ये पहरे में।
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