Rashmi Mamgain

कुछ तो है बात उनके चेहरे में

कुछ तो है बात उनके चेहरे में
दिल धड़कता है क्यूँ ये लम्हे में

यूँ तो झुकना नहीं है फ़ितरत पर
झुक गए हम उन्हें मनाने में।

क्या वो बातें करे उसूलों की
रोज़ बिकती है जो निवाले में।

जब परिंदे उड़ान भरते हैं
वक़्त लगता है लौट आने में।

क्या भरोसा है उन ईमानों का
बिक रहे रोज़ चंद पैसे में।

रुख़सती पे जो मेरी आये हो
देर कर दी हुज़ूर आने में।

बागबां ने बचाने को अस्मत
फूल रक्खा है क्यूँ ये पहरे में।

🌹रश्मि ममगाईं🌹